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mahabharat 1.64.20: राजन! उस समय ब्राह्मण न तो वेद बेचते थे और न शूद्रों के पास वेद मन्त्रों का उच्चारण करते थे। 20॥   |   mahabharat अध्याय 1.64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.64.20 
न च विक्रीणते ब्रह्म ब्राह्मणाश्च तदा नृप।
न च शूद्रसमभ्याशे वेदानुच्चारयन्त्युत॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस समय ब्राह्मण न तो वेद बेचते थे और न शूद्रों के पास वेद मन्त्रों का उच्चारण करते थे। 20॥
 
Rajan! At that time Brahmins neither sold Vedas nor chanted Veda mantras near Shudras. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)