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mahabharat 1.64.17: महाराज! उन दिनों कोई भी व्यक्ति बाल्यावस्था में नहीं मरता था। कोई भी पुरुष युवावस्था प्राप्त करने तक स्त्री का सुख नहीं भोग सकता था।   |   mahabharat अध्याय 1.64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.64.17 
न बाल एव म्रियते तदा कश्चिज्जनाधिप।
न च स्त्रियं प्रजानाति कश्चिदप्राप्तयौवन:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उन दिनों कोई भी व्यक्ति बाल्यावस्था में नहीं मरता था। कोई भी पुरुष युवावस्था प्राप्त करने तक स्त्री का सुख नहीं भोग सकता था।
 
King! In those days no one died in childhood. No man could experience the happiness of a woman until he had attained youth. 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)