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mahabharat 1.64.16: इस प्रकार धर्मात्मा क्षत्रियों के शासन में सारा देश और काल अत्यंत सुखमय प्रतीत होता था। उस समय सहस्त्र नेत्रों वाले देवराज इन्द्र समय पर वर्षा करके प्रजा का पालन करते थे।   |   mahabharat अध्याय 1.64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.64.16 
तथा धर्मपरे क्षत्रे सहस्राक्ष: शतक्रतु:।
स्वादु देशे च काले च वर्षेणापालयत् प्रजा:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार धर्मात्मा क्षत्रियों के शासन में सारा देश और काल अत्यंत सुखमय प्रतीत होता था। उस समय सहस्त्र नेत्रों वाले देवराज इन्द्र समय पर वर्षा करके प्रजा का पालन करते थे।
 
In this way, under the rule of the pious Kshatriyas, the entire country and time seemed very pleasant. At that time, the thousand-eyed Devraja Indra used to take care of the people by raining on time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)