श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  1.63.33-34 
वासवा: पञ्च राजान: पृथग्वंशाश्च शाश्वता:।
वसन्तमिन्द्रप्रासादे आकाशे स्फाटिके च तम्॥ ३३॥
उपतस्थुर्महात्मानं गन्धर्वाप्सरसो नृपम्।
राजोपरिचरेत्येवं नाम तस्याथ विश्रुतम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
पाँचों वसुपुत्र भिन्न-भिन्न देशों के राजा थे और उन्होंने अपना सनातन वंश अलग-अलग चलाया । चेदिराज वसु इन्द्र द्वारा प्रदत्त स्फटिक मणियुक्त विमान में आकाश में निवास करते थे । उस समय गन्धर्व और अप्सराएँ उस महाबली राजा की सेवा में उपस्थित रहती थीं । सदैव ऊपर विचरण करने के कारण उनका नाम 'राजा उपरिचर' प्रसिद्ध हुआ । 33-34॥
 
All five Vasuputras were kings of different countries and they continued their eternal lineage separately. Chediraj Vasu resided in the sky in the crystal gem plane given by Indra. At that time, Gandharvas and Apsaras were present in the service of that great king. Due to always walking on top, his name became famous as 'Raja Uparichar'. 33-34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)