श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 62:  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  1.62.31-32 
वंशमाप्नोति विपुलं लोके पूज्यतमो भवेत्।
योऽधीते भारतं पुण्यं ब्राह्मणो नियतव्रत:॥ ३१॥
चतुरो वार्षिकान् मासान् सर्वपापै: प्रमुच्यते।
विज्ञेय: स च वेदानां पारगो भारतं पठन्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
इसके अतिरिक्त वह बड़ी सन्तान वाला और लोक में अत्यन्त प्रतिष्ठित होता है। जो ब्राह्मण ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हुए वर्षा ऋतु में चार महीनों तक इस पवित्र महाभारत का निरन्तर पाठ करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है। जो महाभारत का पाठ करता है, उसे सभी वेदों का पारंगत विद्वान समझना चाहिए॥ 31-32॥
 
Besides this, he gets a large progeny and is highly respected in the world. A Brahmin who regularly observes the vow of celibacy and continuously recites this sacred Mahabharata for four months during the rainy season, becomes free from all sins. One who recites the Mahabharata should be considered a scholar well versed in all the Vedas.॥ 31-32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)