श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 62:  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.62.24 
सम्प्रत्याचक्षते चेदं तथा श्रोष्यन्ति चापरे।
पुत्रा: शुश्रूषव: सन्ति प्रेष्याश्च प्रियकारिण:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जो लोग वर्तमान समय में इसका पाठ करेंगे और जो लोग भविष्य में इसका श्रवण करेंगे, उनके पुत्र सेवा में तत्पर होंगे और अपने स्वामियों को प्रिय होंगे ॥24॥
 
Those who recite this in the present times and those who will listen to it in the future, their sons will be devoted to service and will be dear to their masters. ॥24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)