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mahabharat 1.60.17: तत्पश्चात् राजा जनमेजय ने समस्त सभासदों सहित हाथ जोड़कर द्विजश्रेष्ठ व्यासजी से इस प्रकार पूछा॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.60: जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 60: जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.60.17 
ततस्तु सहित: सर्वै: सदस्यैर्जनमेजय:।
इदं पश्चाद् द्विजश्रेष्ठं पर्यपृच्छत् कृताञ्जलि:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा जनमेजय ने समस्त सभासदों सहित हाथ जोड़कर द्विजश्रेष्ठ व्यासजी से इस प्रकार पूछा॥17॥
 
Thereafter, King Janamejaya along with all the members folded his hands and asked Vyasji, the best of the Dvijas, in this manner. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)