श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 60: जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.60.14 
प्रतिगृह्य तु तां पूजां पाण्डवाज्जनमेजयात्।
गां चैव समनुज्ञाप्य व्यास: प्रीतोऽभवत् तदा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
पाण्डववंशी जनमेजय से उस पूजा को स्वीकार करके और गौ के प्रति आदर प्रकट करके व्यासजी उस समय बहुत प्रसन्न हुए ॥14॥
 
Having accepted that worship from the Pandava descendant Janamejaya and expressing his respect for the cow, Vyasa became very happy at that time. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)