Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.58.29: इस प्रकार मैंने तुमसे अस्थिका की पूरी कथा कही है, जिसे पढ़ने के बाद कहीं भी सर्पों का भय नहीं रहता।   |   mahabharat अध्याय 1.58: यज्ञकी समाप्ति एवं आस्तीकका सर्पोंसे वर प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 58: यज्ञकी समाप्ति एवं आस्तीकका सर्पोंसे वर प्राप्त करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.58.29 
इत्याख्यानं मयाऽऽस्तीकं यथावत् तव कीर्तितम्।
यत् कीर्तयित्वा सर्पेभ्यो न भयं विद्यते क्वचित्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने तुमसे अस्थिका की पूरी कथा कही है, जिसे पढ़ने के बाद कहीं भी सर्पों का भय नहीं रहता।
 
In this manner I have narrated to you the tale of Asthika in its entirety; after reciting which one is not afraid of snakes anywhere.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)