vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 58: यज्ञकी समाप्ति एवं आस्तीकका सर्पोंसे वर प्राप्त करना
»
श्लोक 23
श्लोक
1.58.23
असितं चार्तिमन्तं च सुनीथं चापि य: स्मरेत्।
दिवा वा यदि वा रात्रौ नास्य सर्पभयं भवेत्॥ २३॥
अनुवाद
जो कोई दिन या रात्रि में असित, आर्तिमान और सुनीथ मंत्र का पाठ करता है, उसे सर्पों का भय नहीं रहता। 23॥
'Whoever recites Asit, Artiman and Sunith mantras during the day or night will have no fear of snakes. 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×