Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.58.21: आस्तिक बोले - हे नागों! यदि संसार में कोई भी ब्राह्मण या अन्य कोई व्यक्ति प्रसन्न मन से मेरी इस धार्मिक कथा को पढ़े, तो उसे आप सब से किसी प्रकार का भय न रहे। | mahabharat अध्याय 1.58: यज्ञकी समाप्ति एवं आस्तीकका सर्पोंसे वर प्राप्त करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आस्तीक उवाच
सायं प्रातर्ये प्रसन्नात्मरूपा
लोके विप्रा मानवा ये परेऽपि।
धर्माख्यानं ये पठेयुर्ममेदं
तेषां युष्मन्नैव किंचिद् भयं स्यात्॥ २१॥
अनुवाद
आस्तिक बोले - हे नागों! यदि संसार में कोई भी ब्राह्मण या अन्य कोई व्यक्ति प्रसन्न मन से मेरी इस धार्मिक कथा को पढ़े, तो उसे आप सब से किसी प्रकार का भय न रहे।
Aastik said - O Naga people! If any Brahmin or any other person in the world with a happy mind reads this religious story of mine, he should not have any fear from you all.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥