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mahabharat 1.58.20: वे सब बार-बार कहने लगे - 'विद्वान! आज हम आपका कौन-सा प्रिय कार्य करें? पुत्र! आपने हमें मृत्यु के मुख से बचा लिया है, इसलिए हम सब आप पर बहुत प्रसन्न हैं। बताइए, आपकी कौन-सी इच्छा हम पूरी करें?'॥ 20॥   |   mahabharat अध्याय 1.58: यज्ञकी समाप्ति एवं आस्तीकका सर्पोंसे वर प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 58: यज्ञकी समाप्ति एवं आस्तीकका सर्पोंसे वर प्राप्त करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.58.20 
भूयो भूय: सर्वशस्तेऽब्रुवंस्तं
किं ते प्रियं करवामाद्य विद्वन्।
प्रीता वयं मोक्षिताश्चैव सर्वे
कामं किं ते करवामाद्य वत्स॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वे सब बार-बार कहने लगे - 'विद्वान! आज हम आपका कौन-सा प्रिय कार्य करें? पुत्र! आपने हमें मृत्यु के मुख से बचा लिया है, इसलिए हम सब आप पर बहुत प्रसन्न हैं। बताइए, आपकी कौन-सी इच्छा हम पूरी करें?'॥ 20॥
 
All of them started saying again and again-'Vidwan! Which of your favourite tasks should we perform today? Son! You have saved us from the jaws of death; hence we are all very pleased with you. Tell us, which of your wishes should we fulfill?'॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)