| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 57: सर्पयज्ञमें दग्ध हुए प्रधान-प्रधान सर्पोंके नाम » श्लोक 13-14h |
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| | | | श्लोक 1.57.13-14h  | एरक: कुण्डलो वेणी वेणीस्कन्ध: कुमारक:।
बाहुक: शृंगवेरश्च धूर्तक: प्रातरातकौ॥ १३॥
कौरव्यकुलजास्त्वेते प्रविष्टा हव्यवाहनम्। | | | | | | अनुवाद | | कौरव्य वंश के एरक, कुंडल, वेणी, वेणीस्कंध, कुमारक, बाहुक, श्रृंगवेर, धूर्तक, प्रतार और अटक-ये नाग यज्ञ में भस्म हो गये। 13 1/2॥ | | | | Erak, Kundal, Veni, Veniskandha, Kumarak, Bahuk, Shringvera, Dhurtak, Pratar and Ataka - these snakes of Kauravya clan were burnt in the sacrificial fire. 13 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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