श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 55: आस्तीकके द्वारा यजमान, यज्ञ, ऋत्विज्, सदस्यगण और अग्निदेवकी स्तुति-प्रशंसा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.55.5 
नृगस्य यज्ञस्त्वजमीढस्य चासीद्
यथा यज्ञो दाशरथेश्च राज्ञ:।
तथा यज्ञोऽयं तव भारताग्रॺ
पारिक्षित स्वस्ति नोऽस्तु प्रियेभ्य:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
परीक्षित कुमार! जिस प्रकार राजा नृग, राजा अजमीढ़ और राजा दशरथनन्दन श्री रामचन्द्रजी ने यज्ञ किया था, उसी प्रकार आपका यज्ञ भी है। हमारे प्रियजनों को आशीर्वाद मिले। ॥ 5॥
 
Parikshit Kumar! Just like the yajnas performed by King Nriga, King Ajamidh and King Dasharathanandan Shri Ramchandraji, your yajna is also similar. May our dear ones be blessed. ॥ 5॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas