Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.54.9: हे प्रिय भाई वासुकि ने भी उस समय मेरे पितामह के वचन सुने थे। फिर अमृत मंथन समाप्त होने पर वे देवताओं की शरण में गए।   |   mahabharat अध्याय 1.54: माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 54: माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.54.9 
वासुकिश्चापि तच्छ्रुत्वा पितामहवचस्तदा।
अमृते मथिते तात देवाञ्छरणमीयिवान्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिय भाई वासुकि ने भी उस समय मेरे पितामह के वचन सुने थे। फिर अमृत मंथन समाप्त होने पर वे देवताओं की शरण में गए।
 
O dear brother Vasuki also heard the words of my grandfather at that time. Then after the churning of the nectar was over, he went to the gods for refuge.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)