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श्लोक 1.54.22  |
स सम्भावय नागेन्द्र मयि सर्वं महामते।
न ते मयि मनो जातु मिथ्या भवितुमर्हति॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| हे परम बुद्धिमान नागराज! मुझमें यह सब करने की क्षमता है, इस पर विश्वास रखो। मुझ पर तुम्हारी आशा और विश्वास कभी मिथ्या नहीं हो सकता।॥ 22॥ |
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| ‘O very intelligent Nagaraj! I have the capability to do all this, please have faith in this. The hope and trust you have in me can never be false.’॥ 22॥ |
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