श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 53: सर्पयज्ञके ऋत्विजोंकी नामावली, सर्पोंका भयंकर विनाश, तक्षकका इन्द्रकी शरणमें जाना तथा वासुकिका अपनी बहिनसे आस्तीकको यज्ञमें भेजनेके लिये कहना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.53.24 
अयं स काल: सम्प्राप्तो यदर्थमसि मे स्वस:।
जरत्कारौ मया दत्ता त्रायस्वास्मान् सबान्धवान्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'बहन! जिस अवसर के लिए मैंने तुम्हारा विवाह जरत्कारु ऋषि के साथ किया था, वह आ गया है। तुम और तुम्हारे बंधु-बांधव हमारी रक्षा करो॥ 24॥
 
'Sister! The opportunity for which I had married you to sage Jaratkaru has arrived. You and your relatives please protect us.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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