श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 51: जनमेजयके सर्पयज्ञका उपक्रम  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.51.16 
यस्मिन् देशे च काले च मापनेयं प्रवर्तिता।
ब्राह्मणं कारणं कृत्वा नायं संस्थास्यते क्रतु:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जिस स्थान और समय पर यज्ञवेदी को नापने का कार्य आरम्भ किया गया, उसे देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि ब्राह्मण को बहाने के बिना यह यज्ञ पूर्ण नहीं हो सकता। ॥16॥
 
"Looking at the place and time at which the process of measuring the sacrificial altar was started, it appears that this sacrifice cannot be completed without using a Brahmin as an excuse." ॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)