श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 50: शृंगी ऋषिका परीक्षित् को शाप, तक्षकका काश्यपको लौटाकर छलसे परीक्षित् को डँसना और पिताकी मृत्युका वृत्तान्त सुनकर जनमेजयकी तक्षकसे बदला लेनेकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  1.50.42 
द्विजप्रभावाद् राजेन्द्र व्यजीवत् सवनस्पति:।
तेनागम्य नरश्रेष्ठ पुंसास्मासु निवेदितम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
परन्तु राजेन्द्र! ब्राह्मण के प्रभाव से वह भी उस वृक्ष के साथ जीवित हो गया। हे पुरुषश्रेष्ठ! उसी पुरुष ने आकर हमसे तक्षक और ब्राह्मण का प्रसंग कहा। 42।
 
But Rajendra! Due to the influence of the Brahmin, he too came back to life along with that tree. O best of men! That same man came and told us the incident of Takshak and the Brahmin. 42.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)