श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 50: शृंगी ऋषिका परीक्षित् को शाप, तक्षकका काश्यपको लौटाकर छलसे परीक्षित् को डँसना और पिताकी मृत्युका वृत्तान्त सुनकर जनमेजयकी तक्षकसे बदला लेनेकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.50.2 
ऋषेस्तस्य तु पुत्रोऽभूद् गवि जातो महायशा:।
शृङ्गी नाम महातेजास्तिग्मवीर्योऽतिकोपन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस ऋषि के श्रृंगी नाम का एक अत्यंत तेजस्वी पुत्र था, जो गौ के गर्भ से उत्पन्न हुआ था। वह अत्यंत यशस्वी, अत्यंत पराक्रमी और अत्यंत क्रोधी था॥2॥
 
That sage had a very brilliant son named Shringi, who was born from the womb of a cow. He was very famous, very powerful and very short-tempered.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)