Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.46.6-7: अतः मैंने मन ही मन निश्चय कर लिया था कि मैं कभी विवाह नहीं करूँगा। किन्तु हे पितामह! आपको पक्षियों की भाँति विचरण करते देखकर मैंने अखण्ड ब्रह्मचर्य का संकल्प लेकर अपनी चेतना पुनः प्राप्त कर ली है। अब मैं आपकी प्रिय इच्छा अवश्य पूरी करूँगा और विवाह अवश्य करूँगा। 6-7। | mahabharat अध्याय 1.46: जरत्कारुका शर्तके साथ विवाहके लिये उद्यत होना और नागराज वासुकिका जरत्कारु नामकी कन्याको लेकर आना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न दारान् वै करिष्येऽहमिति मे भावितं मन:।
एवं दृष्ट्वा तु भवत: शकुन्तानिव लम्बत:॥ ६॥
मया निवर्तिता बुद्धिर्ब्रह्मचर्यात् पितामहा:।
करिष्ये व: प्रियं कामं निवेक्ष्येऽहमसंशयम्॥ ७॥
अनुवाद
अतः मैंने मन ही मन निश्चय कर लिया था कि मैं कभी विवाह नहीं करूँगा। किन्तु हे पितामह! आपको पक्षियों की भाँति विचरण करते देखकर मैंने अखण्ड ब्रह्मचर्य का संकल्प लेकर अपनी चेतना पुनः प्राप्त कर ली है। अब मैं आपकी प्रिय इच्छा अवश्य पूरी करूँगा और विवाह अवश्य करूँगा। 6-7।
Therefore, I had firmly resolved in my mind that I would never marry a wife. But, O great grandfather, seeing you hanging around like birds, I have regained my senses by taking the resolve to observe unbroken celibacy. Now I will fulfill your favourite wish and will certainly get married. 6-7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥