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mahabharat 1.46.2-3: जरत्कारु बोले - आप मेरे पूर्वज, पिता और पितामह आदि हैं। अतः मुझे बताइए कि मैं आपकी प्रसन्नता के लिए क्या करूँ। मैं आपका पुत्र पापी जरत्कारु हूँ। आप मुझ कृतघ्न पापी को अपनी इच्छानुसार दण्ड दीजिए॥ 2-3॥   |   mahabharat अध्याय 1.46: जरत्कारुका शर्तके साथ विवाहके लिये उद्यत होना और नागराज वासुकिका जरत्कारु नामकी कन्याको लेकर आना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 46: जरत्कारुका शर्तके साथ विवाहके लिये उद्यत होना और नागराज वासुकिका जरत्कारु नामकी कन्याको लेकर आना  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  1.46.2-3 
जरत्कारुरुवाच
मम पूर्वे भवन्तो वै पितर: सपितामहा:।
तद् ब्रूत यन्मया कार्यं भवतां प्रियकाम्यया॥ २॥
अहमेव जरत्कारु: किल्बिषी भवतां सुत:।
ते दण्डं धारयत मे दुष्कृतेरकृतात्मन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जरत्कारु बोले - आप मेरे पूर्वज, पिता और पितामह आदि हैं। अतः मुझे बताइए कि मैं आपकी प्रसन्नता के लिए क्या करूँ। मैं आपका पुत्र पापी जरत्कारु हूँ। आप मुझ कृतघ्न पापी को अपनी इच्छानुसार दण्ड दीजिए॥ 2-3॥
 
Jaratkaru said - You are my ancestor, father and grandfather etc. So tell me what should I do to please you. I am your son, the sinful Jaratkaru. Please punish me, an ungrateful sinner, as per your wish.॥ 2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)