श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 46: जरत्कारुका शर्तके साथ विवाहके लिये उद्यत होना और नागराज वासुकिका जरत्कारु नामकी कन्याको लेकर आना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.46.14 
यानि भूतानि सन्तीह स्थावराणि चराणि च।
अन्तर्हितानि वा यानि तानि शृण्वन्तु मे वच:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
(फिर उन्होंने ऊंचे स्वर से कहा-) 'यहाँ जितने भी जीव हैं, चाहे वे स्थावर हों या जंगम, दृश्य हों या अदृश्य, वे सब मेरी बात सुनें॥ 14॥
 
(Then he said loudly -) 'All the living beings here, whether mobile or immobile, visible or invisible, should listen to me.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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