श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.43.3 
काश्यप उवाच
दश नागेन्द्र वृक्षं त्वं यद्येतदभिमन्यसे।
अहमेनं त्वया दष्टं जीवयिष्ये भुजङ्गम॥ ३॥
 
 
अनुवाद
कश्यप बोले- सर्पराज! यदि तुम्हें इतना अभिमान है तो इस वृक्ष को डस लो। भुजंगम! मैं इस वृक्ष को, जिसे तुमने काटा है, पुनर्जीवित कर दूँगा।
 
Kashyap said- King of snakes! If you have so much pride then bite this tree. Bhujangam! I will revive this tree that you have bitten.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)