Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.42.7: तुम जंगली कंद, मूल और फल खाकर अपने मन और इंद्रियों को वश में करने में तत्पर रहो, इस क्रोध को दूर करो और अच्छा आचरण करो; ऐसा करने से तुम्हारे धर्म की हानि नहीं होगी॥7॥ | mahabharat अध्याय 1.42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तुम जंगली कंद, मूल और फल खाकर अपने मन और इंद्रियों को वश में करने में तत्पर रहो, इस क्रोध को दूर करो और अच्छा आचरण करो; ऐसा करने से तुम्हारे धर्म की हानि नहीं होगी॥7॥
You should be ready to control your mind and senses by eating wild tubers, roots and fruits, get rid of this anger and behave well; By doing this your religion will not be harmed. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥