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mahabharat 1.42.27: तत्पश्चात् राजा ने गौरमुख को यह सन्देश देकर विदा किया कि, 'महान ऋषि शमीक यहां पधारें और मुझे पुनः आशीर्वाद दें।'   |   mahabharat अध्याय 1.42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.42.27 
ततस्तं प्रेषयामास राजा गौरमुखं तदा।
भूय: प्रसादं भगवान् करोत्विह ममेति वै॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा ने गौरमुख को यह सन्देश देकर विदा किया कि, 'महान ऋषि शमीक यहां पधारें और मुझे पुनः आशीर्वाद दें।'
 
Thereafter the King sent Gaurmukha away with the message, 'May the great sage Shamik come here and bless me once again.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)