Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.42.26: राजा परीक्षित जो देवता के समान थे, अपनी मृत्यु का शाप सुनकर उतने दुःखी नहीं हुए, जितने कि ऋषि के प्रति अपने व्यवहार को स्मरण करके शोकित हुए॥ 26॥ | mahabharat अध्याय 1.42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हि मृत्युं तथा राजा श्रुत्वा वै सोऽन्वतप्यत।
अशोचदमरप्रख्यो यथा कृत्वेह कर्म तत्॥ २६॥
अनुवाद
राजा परीक्षित जो देवता के समान थे, अपनी मृत्यु का शाप सुनकर उतने दुःखी नहीं हुए, जितने कि ऋषि के प्रति अपने व्यवहार को स्मरण करके शोकित हुए॥ 26॥
King Parikshit, who was like a god, was not as distressed on hearing the curse of his death as he was grieving on remembering his behaviour towards the sage.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥