Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.42.24: यह सुनकर कि महर्षि उस समय वन में मौन व्रत धारण किए हुए हैं, राजा परीक्षित का मन और भी शोक और वेदना से भर गया ॥24॥ | mahabharat अध्याय 1.42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं च मौनव्रतं श्रुत्वा वने मुनिवरं तदा।
भूय एवाभवद् राजा शोकसंतप्तमानस:॥ २४॥
अनुवाद
यह सुनकर कि महर्षि उस समय वन में मौन व्रत धारण किए हुए हैं, राजा परीक्षित का मन और भी शोक और वेदना से भर गया ॥24॥
Hearing that the great sage was at that time observing a vow of silence in the forest, King Parikshit's mind was further filled with grief and anguish. ॥24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥