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mahabharat 1.42.22: स्वयं ऋषि भी अपने क्रोधी पुत्र को शांत करने में असमर्थ हैं। इसलिए हे राजन, उन्होंने आपका कल्याण करने के लिए मुझे यहाँ भेजा है।   |   mahabharat अध्याय 1.42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.42.22 
न हि शक्नोति तं यन्तुं पुत्रं कोपसमन्वितम्।
ततोऽहं प्रेषितस्तेन तव राजन् हितार्थिना॥ २२॥
 
 
अनुवाद
स्वयं ऋषि भी अपने क्रोधी पुत्र को शांत करने में असमर्थ हैं। इसलिए हे राजन, उन्होंने आपका कल्याण करने के लिए मुझे यहाँ भेजा है।
 
Even the sage himself is unable to pacify his son who is filled with anger. Therefore, O King, he has sent me here in order to seek your welfare.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)