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mahabharat 1.42.21: ऐसी स्थिति में तुम्हें अपनी रक्षा का प्रबंध स्वयं ही करना चाहिए। ऐसा ऋषि ने बार-बार कहा है। उस शाप को कोई टाल नहीं सकता ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 1.42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.42.21 
तत्र रक्षां कुरुष्वेति पुन: पुनरथाब्रवीत् ।
तदन्यथा न शक्यं च कर्तुं केनचिदप्युत॥ २१॥
 
 
अनुवाद
ऐसी स्थिति में तुम्हें अपनी रक्षा का प्रबंध स्वयं ही करना चाहिए। ऐसा ऋषि ने बार-बार कहा है। उस शाप को कोई टाल नहीं सकता ॥21॥
 
In this situation, you should make arrangements for your own protection. The sage has said this repeatedly. No one can avert that curse. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)