श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.41.27 
अराजके जनपदे दोषा जायन्ति वै सदा।
उद्‍वृत्तं सततं लोकं राजा दण्डेन शास्ति वै॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जिस देश में राजा नहीं होता, वहाँ अनेक प्रकार के अनिष्ट (चोरों का भय आदि) उत्पन्न होते हैं। जो लोग धर्म की मर्यादा त्यागकर दुराचारी हो गए हैं, उन्हें दण्ड देकर राजा शिक्षा देता है॥27॥
 
In a country where there is no king, many kinds of evils (fear of thieves etc.) arise. The king teaches a lesson by punishing those who have become unruly by abandoning the limits of religion.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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