श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.41.2 
स तं कृशमभिप्रेक्ष्य सूनृतां वाचमुत्सृजन्।
अपृच्छत् तं कथं तात: स मेऽद्य मृतधारक:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उसने उस दुबले-पतले व्यक्ति की ओर देखकर मधुर वाणी में पूछा, "भैया! बताओ, आज मेरे पिता शव को कंधे पर कैसे ढो रहे हैं?"॥2॥
 
Looking at the skinny man he asked in a sweet voice, "Brother! Tell me, how is my father carrying the dead body on his shoulders today?"॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)