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श्लोक 1.40.21  |
तस्य स्कन्धे मृतं सर्पं क्रुद्धो राजा समासजत्।
समुत्क्षिप्य धनुष्कोटॺा स चैनं समुपैक्षत॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| तब राजा क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने धनुष की नोक से एक मरा हुआ साँप उठाकर अपने कंधे पर रख लिया, परन्तु ऋषि ने उनकी बात अनसुनी कर दी। |
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| Then the king became angry and picked up a dead snake from the tip of his bow and placed it on his shoulder, but the sage ignored him. 21. |
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