vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 38: वासुकिकी बहिन जरत्कारुका जरत्कारु मुनिके साथ विवाह करनेका निश्चय
»
श्लोक 11
श्लोक
1.38.11
यन्निमित्तं च भविता मोक्षस्तेषां महाभयात्।
पन्नगानां निबोधध्वं तस्मिन् काले समागते॥ ११॥
अनुवाद
जब वह समय आएगा, तब मैं तुम लोगों को वह उपाय बताऊँगा जिससे सर्प उस महान भय से मुक्त हो जाएँगे। तुम सब लोग कृपया सुनो॥11॥
When that time comes, I shall tell you the means by which the snakes will be freed from that great fear. All of you please listen. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×