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mahabharat 1.36.d1: अनंत नाग के चले जाने के बाद, नागों ने शक्तिशाली वासुकिका नाग राजा को नागों के राजा के रूप में अभिषिक्त किया, ठीक उसी तरह जैसे देवताओं ने इंद्र को देवों के राजा के रूप में अभिषिक्त किया था।   |   mahabharat अध्याय 1.36: शेषनागकी तपस्या, ब्रह्माजीसे वर-प्राप्ति तथा पृथ्वीको सिरपर धारण करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 36: शेषनागकी तपस्या, ब्रह्माजीसे वर-प्राप्ति तथा पृथ्वीको सिरपर धारण करना  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  1.36.d1 
(अनन्ते च प्रयाते तु वासुकि: सुमहाबल:।
अभ्यषिच्यत नागैस्तु दैवतैरिव वासव:॥ )
 
 
अनुवाद
अनंत नाग के चले जाने के बाद, नागों ने शक्तिशाली वासुकिका नाग राजा को नागों के राजा के रूप में अभिषिक्त किया, ठीक उसी तरह जैसे देवताओं ने इंद्र को देवों के राजा के रूप में अभिषिक्त किया था।
 
After the departure of Ananta Naga, the snakes anointed the mighty Vasukika Naga King as the King of Snakes in the same manner as the Gods had anointed Indra as the King of Devas.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि शेषवृत्तकथने षट्‍‍त्रिंशोऽध्याय:॥ ३६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें शेषनागवृत्तान्त-कथनविषयक छत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३६॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १ श्लोक मिलाकर कुल २६ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)