Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.36.22: उग्रश्रवाजी कहते हैं - सर्पराज वासुकि के बड़े भाई सर्वशक्तिमान भगवान शेष ने 'बहुत अच्छा' कहकर ब्रह्माजी की आज्ञा स्वीकार की और पृथ्वी की गुहा में प्रवेश करके उन्होंने चारों ओर से समुद्र से घिरी हुई इस पृथ्वी माता को पकड़कर अपने सिर पर धारण कर लिया (तब से पृथ्वी स्थिर हो गई)।॥22॥ | mahabharat अध्याय 1.36: शेषनागकी तपस्या, ब्रह्माजीसे वर-प्राप्ति तथा पृथ्वीको सिरपर धारण करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उग्रश्रवाजी कहते हैं - सर्पराज वासुकि के बड़े भाई सर्वशक्तिमान भगवान शेष ने 'बहुत अच्छा' कहकर ब्रह्माजी की आज्ञा स्वीकार की और पृथ्वी की गुहा में प्रवेश करके उन्होंने चारों ओर से समुद्र से घिरी हुई इस पृथ्वी माता को पकड़कर अपने सिर पर धारण कर लिया (तब से पृथ्वी स्थिर हो गई)।॥22॥
Ugrasravaji says - The all-powerful Lord Shesh, the elder brother of King of Serpents Vasuki, accepted Brahmaji's command saying 'very good' and entering the cavity of the earth, he caught hold of this Mother Earth surrounded by the ocean from all sides and held her on his head (since then the earth became stable).॥22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥