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mahabharat 1.36.13: जब शेषनाग इस प्रकार बोल रहे थे, तब ब्रह्माजी ने उनसे कहा, 'शेष! मैं तुम्हारे सभी भाइयों की दुष्टता जानता हूँ।' ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.36: शेषनागकी तपस्या, ब्रह्माजीसे वर-प्राप्ति तथा पृथ्वीको सिरपर धारण करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 36: शेषनागकी तपस्या, ब्रह्माजीसे वर-प्राप्ति तथा पृथ्वीको सिरपर धारण करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.36.13 
तमेवंवादिनं शेषं पितामह उवाच ह।
जानामि शेष सर्वेषां भ्रातॄणां ते विचेष्टितम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जब शेषनाग इस प्रकार बोल रहे थे, तब ब्रह्माजी ने उनसे कहा, 'शेष! मैं तुम्हारे सभी भाइयों की दुष्टता जानता हूँ।' ॥13॥
 
When Sheshnag was speaking like this, Lord Brahma said to him, 'Sesha! I know the evil intentions of all your brothers.' ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)