Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.36.10: वे विनता और उसके पुत्रों से ईर्ष्या करते हैं और उनका सुख-सुविधा सहन नहीं कर पाते। आकाश में विचरण करने वाला विनता का पुत्र गरुड़ भी हमारा दूसरा भाई है॥10॥ | mahabharat अध्याय 1.36: शेषनागकी तपस्या, ब्रह्माजीसे वर-प्राप्ति तथा पृथ्वीको सिरपर धारण करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न मर्षयन्ति ससुतां सततं विनतां च ते।
अस्माकं चापरो भ्राता वैनतेयोऽन्तरिक्षग:॥ १०॥
अनुवाद
वे विनता और उसके पुत्रों से ईर्ष्या करते हैं और उनका सुख-सुविधा सहन नहीं कर पाते। आकाश में विचरण करने वाला विनता का पुत्र गरुड़ भी हमारा दूसरा भाई है॥10॥
They are jealous of Vinata and her sons and cannot tolerate their comforts. Garuda, Vinata's son who roams in the sky, is also our other brother.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥