Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.34.15-16: श्रीहरि ने भी गरुड़ की बात का अनुमोदन किया। तत्पश्चात, स्वर्ग के स्वामी इंद्र ने गरुड़ से पुनः कहा, 'जैसे ही तुम इस अमृत को कहीं रख दोगे, मैं इसे वापस ले आऊँगा।' (यह कहकर इंद्र चले गए)। तब सुंदर पंखों वाला गरुड़ तुरंत अपनी माता के पास आया। 15-16. | mahabharat अध्याय 1.34: इन्द्र और गरुडकी मित्रता, गरुडका अमृत लेकर नागोंके पास आना और विनताको दासीभावसे छुड़ाना तथा इन्द्रद्वारा अमृतका अपहरण । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीहरि ने भी गरुड़ की बात का अनुमोदन किया। तत्पश्चात, स्वर्ग के स्वामी इंद्र ने गरुड़ से पुनः कहा, 'जैसे ही तुम इस अमृत को कहीं रख दोगे, मैं इसे वापस ले आऊँगा।' (यह कहकर इंद्र चले गए)। तब सुंदर पंखों वाला गरुड़ तुरंत अपनी माता के पास आया। 15-16.
Sri Hari also approved of what Garuda said. Thereafter Lord Indra, the Lord of heaven, again addressed Garuda and said, 'The moment you keep this nectar somewhere, I will bring it back' (saying this Indra went away). Then Garuda with beautiful wings immediately came near his mother. 15-16.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥