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mahabharat 1.33.15: तब भगवान विष्णु ने विनतानन्दन गरुड़ से कहा- ‘एवमस्तु’- ऐसा ही हो। दोनों वरदान स्वीकार करके गरुड़ ने भगवान विष्णु से कहा- 15॥   |   mahabharat अध्याय 1.33: गरुडका अमृत लेकर लौटना, मार्गमें भगवान् विष्णुसे वर पाना एवं उनपर इन्द्रके द्वारा वज्र-प्रहार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 33: गरुडका अमृत लेकर लौटना, मार्गमें भगवान् विष्णुसे वर पाना एवं उनपर इन्द्रके द्वारा वज्र-प्रहार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.33.15 
एवमस्त्विति तं विष्णुरुवाच विनतासुतम्।
प्रतिगृह्य वरौ तौ च गरुडो विष्णुमब्रवीत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान विष्णु ने विनतानन्दन गरुड़ से कहा- ‘एवमस्तु’- ऐसा ही हो। दोनों वरदान स्वीकार करके गरुड़ ने भगवान विष्णु से कहा- 15॥
 
Then Lord Vishnu said to Vintanandan Garuda – ‘Evamastu’ – may it be so. After accepting both the boons, Garuda said to Lord Vishnu – 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)