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mahabharat 1.30.9: वालखिल्य ऋषियों के प्रति दया के भाव के कारण वे कहीं बैठ न सके और उड़ते हुए बिना किसी प्रयास के ही उत्तम पर्वत गन्धमादन पर पहुँच गए॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.30.9 
दयार्थं वालखिल्यानां न च स्थानमविन्दत।
स गत्वा पर्वतश्रेष्ठं गन्धमादनमञ्जसा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वालखिल्य ऋषियों के प्रति दया के भाव के कारण वे कहीं बैठ न सके और उड़ते हुए बिना किसी प्रयास के ही उत्तम पर्वत गन्धमादन पर पहुँच गए॥9॥
 
Due to the feeling of pity towards the Valakhilya sages, they could not sit anywhere and while flying, they reached Gandhamadana, the best mountain, without any effort. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)