Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.30.8: इसके बाद गरुड़ धीरे-धीरे उड़ने लगे और अपने पंखों की हवा से बड़े-बड़े पर्वतों को हिलाने लगे। इस प्रकार वे हाथी और कछुए के साथ विभिन्न देशों में उड़ते रहे। | mahabharat अध्याय 1.30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसके बाद गरुड़ धीरे-धीरे उड़ने लगे और अपने पंखों की हवा से बड़े-बड़े पर्वतों को हिलाने लगे। इस प्रकार वे हाथी और कछुए के साथ विभिन्न देशों में उड़ते रहे।
Thereafter Garuda started flying slowly, shaking the big mountains with the wind from his wings. In this way he kept flying to various countries along with the elephant and the tortoise.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥