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mahabharat 1.30.21: तब कश्यप ने उन्हें एक ऐसे पर्वत के बारे में बताया जो पूर्णतः निर्जन था, जिसकी गुफाएं बर्फ से ढकी हुई थीं और जहां कोई भी मन से भी नहीं पहुंच सकता था।   |   mahabharat अध्याय 1.30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.30.21 
ततो नि:पुरुषं शैलं हिमसंरुद्धकन्दरम्।
अगम्यं मनसाप्यन्यैस्तस्याचख्यौ स कश्यप:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तब कश्यप ने उन्हें एक ऐसे पर्वत के बारे में बताया जो पूर्णतः निर्जन था, जिसकी गुफाएं बर्फ से ढकी हुई थीं और जहां कोई भी मन से भी नहीं पहुंच सकता था।
 
Then Kashyap told him about a mountain which was completely uninhabited, whose caves were covered with snow and where no one could reach even by mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)