Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.30.2: विशाल शाखा तोड़कर गरुड़ मुस्कुराते हुए उसे देखने लगे। तभी उनकी दृष्टि वालखिल्य नामक महर्षियों पर पड़ी, जो उसी शाखा से नीचे मुँह करके लटके हुए थे। | mahabharat अध्याय 1.30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तां भङ्क्त्वा स महाशाखां स्मयमानो विलोकयन्।
अथात्र लम्बतोऽपश्यद् वालखिल्यानधोमुखान्॥ २॥
अनुवाद
विशाल शाखा तोड़कर गरुड़ मुस्कुराते हुए उसे देखने लगे। तभी उनकी दृष्टि वालखिल्य नामक महर्षियों पर पड़ी, जो उसी शाखा से नीचे मुँह करके लटके हुए थे।
After breaking the great branch, Garuda started looking at it smilingly. Just then his sight fell on the great sages named Valakhilya, who were hanging from the same branch with their faces down.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥