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mahabharat 1.30.16: उग्रश्रवाजी कहते हैं - तदनन्तर महर्षि कश्यप ने अपने पुत्र के लिए महाभाग वालखिल्य नामक ऋषियों को प्रसन्न किया, जो तपस्या के द्वारा पाप से मुक्त हो गए थे ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 1.30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.30.16 
सौतिरुवाच
तत: प्रसादयामास कश्यप: पुत्रकारणात्।
वालखिल्यान् महाभागांस्तपसा हतकल्मषान्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी कहते हैं - तदनन्तर महर्षि कश्यप ने अपने पुत्र के लिए महाभाग वालखिल्य नामक ऋषियों को प्रसन्न किया, जो तपस्या के द्वारा पाप से मुक्त हो गए थे ॥16॥
 
Ugrashravaji says - Subsequently, for the sake of his son, Maharishi Kashyapa pleased the sages of Mahabhag Valakhilya who had become free from sin through penance. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)