Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.3.93: तत्पश्चात् एक दिन उत्तंक ने पुनः उपाध्याय से कहा - 'भगवन्! कृपया आज्ञा करें कि मैं आपकी प्रिय वस्तुओं में से कौन-सी वस्तु आपको गुरुदक्षिणा में भेंट करूँ?'॥ 93॥ | mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स कदाचिदुपाध्यायमाहोत्तङ्क आज्ञापयतु भवान् किं ते प्रियमुपाहरामि गुर्वर्थमिति॥ ९३॥
अनुवाद
तत्पश्चात् एक दिन उत्तंक ने पुनः उपाध्याय से कहा - 'भगवन्! कृपया आज्ञा करें कि मैं आपकी प्रिय वस्तुओं में से कौन-सी वस्तु आपको गुरुदक्षिणा में भेंट करूँ?'॥ 93॥
Thereafter one day Uttanka again said to Upadhyaya - 'Lord! Please order, which of your favourite things should I present to you as Gurudakshina?'॥ 93॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥