Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.3.78: वेद, अयोध्याधौम्य के तीसरे शिष्य थे। उपाध्याय ने उन्हें आदेश दिया, 'बेटा वेद! तुम कुछ समय तक मेरे घर में रहो। सदैव मेरी सेवा में लगे रहो, यही तुम्हारे लिए कल्याणकारी होगा।' | mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथापर: शिष्यस्तस्यैवायोदस्य धौम्यस्य वेदो नाम तमुपाध्याय: समादिदेश वत्स वेद इहास्यतां तावन्मम गृहे कंचित् कालं शुश्रूषुणा च भवितव्यं श्रेयस्ते भविष्यतीति॥ ७८॥
अनुवाद
वेद, अयोध्याधौम्य के तीसरे शिष्य थे। उपाध्याय ने उन्हें आदेश दिया, 'बेटा वेद! तुम कुछ समय तक मेरे घर में रहो। सदैव मेरी सेवा में लगे रहो, यही तुम्हारे लिए कल्याणकारी होगा।'
Veda was the third disciple of Ayodadhaumya. Upadhyay ordered him, 'Son Veda! You stay here in my house for some time. Always remain engaged in serving me, this will be good for you.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥