Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.3.75: और उसने गुरुजी को सारी बात बताई। उपाध्याय उससे बहुत प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  1.3.75 
आचचक्षे च स चास्य प्रीतिमान् बभूव॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
और उसने गुरुजी को सारी बात बताई। उपाध्याय उससे बहुत प्रसन्न हुए।
 
And he told everything to Guruji. Upadhyay was very pleased with him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)