Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.3.68: अश्विनीकुमार! मैं आप दोनों के गुणों का वर्णन करके उनकी स्तुति नहीं कर सकता। इस समय मैं अंधा हो गया हूँ। मुझसे मार्ग पहचानने में भूल हो जाती है, इसलिए मैं इस दुर्गम कुएँ में गिर पड़ा हूँ। आप दोनों शरणागतों का पालन करने वाले देवता हैं, इसलिए मैं आपकी शरण में जाता हूँ। 68। | mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अश्विनीकुमार! मैं आप दोनों के गुणों का वर्णन करके उनकी स्तुति नहीं कर सकता। इस समय मैं अंधा हो गया हूँ। मुझसे मार्ग पहचानने में भूल हो जाती है, इसलिए मैं इस दुर्गम कुएँ में गिर पड़ा हूँ। आप दोनों शरणागतों का पालन करने वाले देवता हैं, इसलिए मैं आपकी शरण में जाता हूँ। 68।
Ashwinikumar! I cannot praise you both by describing your qualities. At present I have become blind. I make mistakes in recognizing the path; that is why I have fallen in this inaccessible well. You both are gods who care for those who seek refuge; hence I seek refuge in you. 68.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥