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mahabharat 1.3.56: तब उपाध्याय ने कहा, ‘पुत्र! दोनों अश्विनीकुमार देवताओं के वैद्य हैं। तुम्हें उनकी पूजा करनी चाहिए। वे तुम्हारी आँखों को ठीक कर देंगे।’ उपाध्याय के ऐसा कहने पर उपमन्यु ऋग्वेद के मंत्रों से अश्विनीकुमार नामक दोनों देवताओं की स्तुति करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  1.3.56 
तमुपाध्याय: प्रत्युवाच—अश्विनौ स्तुहि। तौ देवभिषजौ त्वां चक्षुष्मन्तं कर्ताराविति। स एवमुक्त उपाध्यायेनोपमन्युरश्विनौ स्तोतुमुपचक्रमे देवावश्विनौ वाग्भिर्ऋग्भि:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
तब उपाध्याय ने कहा, ‘पुत्र! दोनों अश्विनीकुमार देवताओं के वैद्य हैं। तुम्हें उनकी पूजा करनी चाहिए। वे तुम्हारी आँखों को ठीक कर देंगे।’ उपाध्याय के ऐसा कहने पर उपमन्यु ऋग्वेद के मंत्रों से अश्विनीकुमार नामक दोनों देवताओं की स्तुति करने लगा।
 
Then Upadhyaya said, 'Son! Both Ashwinikumars are physicians of the gods. You should worship them. They will cure your eyes.' On Upadhyaya saying this, Upamanyu started praising the two gods named Ashwinikumars with the mantras of Rigveda. 56.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)